नई दिल्ली. स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले से जीएसटी के संबंध में जो ऐलान किया गया उससे आम लोगों को बड़ी राहत की उम्मीद जगा दी है. सरकार ने रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले ज्यादातर सामान पर टैक्स घटाकर उन्हें सस्ता करने का प्रस्ताव रखा है. इसका सीधा असर पैकेज्ड गुड्स, आवश्यक वस्तुओं और दाम के प्रति संवेदनशील कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर दिखेगा.

यह फैसला ऐसे समय आया है जब शहरी मांग धीमी है लेकिन धीरे-धीरे सुधार के संकेत दिख रहे हैं. नए प्रावधानों के मुताबिक 12 फीसदी वाले लगभग 99 प्रतिशत सामान अब 5 फीसदी जीएसटी स्लैब में आ जाएंगे. इससे पैकेज्ड फूड, हेयर ऑयल और जूस जैसे प्रोडक्ट्स ज्यादा किफायती हो जाएंगे. वहीं टीवी, मोबाइल और एयर कंडीशनर जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को भी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी जीएसटी स्लैब में लाने की तैयारी है.

एसी और ड्यूरेबल्स होंगे मास मार्केट प्रोडक्ट

गोदरेज एंटरप्राइजेज ग्रुप के बिजनेस हेड कमल नंदी (Kamal Nandi) का कहना है कि बढ़ती गर्मी के चलते एसी अब लग्जरी नहीं, बल्कि जरूरत बन चुके हैं. जीएसटी को 28 से घटाकर 18 फीसदी करना इन्हें आम लोगों की पहुंच में लाएगा और उनकी लाइफ क्वालिटी बेहतर होगी. रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और माइक्रोवेव जैसे अन्य उपकरण पहले से ही 18 फीसदी स्लैब में हैं, ऐसे में एसी पर टैक्स कटौती गेम चेंजर साबित हो सकती है.

रोजमर्रा की चीजें होंगी सस्ती, मांग में तेजी

ब्रोकरेज हाउस मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) का कहना है कि 12 फीसदी से 5 फीसदी स्लैब में जाने वाले सामान की कीमतें 4-5 फीसदी तक घट सकती हैं. इससे घरों का बजट हल्का होगा और एफएमसीजी प्रोडक्ट्स की खपत बढ़ेगी. एनालिस्ट्स का मानना है कि टैक्स स्लैब घटाने से टियर-2 और टियर-3 शहरों में ड्यूरेबल्स की डिमांड खुल सकती है, जहां टैक्स का बोझ अब तक बाधा बना हुआ था.

कंपनियों के लिए भी फायदेमंद

गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के इंडिया हेड ऑफ सेल्स कृष्णा खातवानी (Krishna Khatwani) का कहना है कि शहरी इलाकों में उपभोक्ता अब आसानी से प्रीमियम कैटेगरी में अपग्रेड कर पाएंगे, जबकि ग्रामीण बाजार में कंपनियां कम दाम और ज्यादा वैल्यू के जरिये बिक्री बढ़ा पाएंगी. इससे एफएमसीजी सेक्टर में वॉल्यूम ग्रोथ तेज हो सकती है.

सावधानी की जरूरत

डेलॉइट इंडिया (Deloitte India) के पार्टनर एमएस मणि (MS Mani) ने चेताया है कि एंटी-प्रॉफिटियरिंग प्रावधानों की गैरमौजूदगी में कंपनियों पर खुद यह जिम्मेदारी होगी कि टैक्स कटौती का फायदा ग्राहकों तक पहुंचे. यानी इस सुधार का असली असर तभी दिखेगा जब इंडस्ट्री अपने मुनाफे से समझौता कर उपभोक्ताओं को राहत दे.

Source : https://hindi.news18.com/news/business/latest-gst-tax-reduction-daily-use-goods-consumer-demand-fmcg-durables-ws-l-9522396.html

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