Market Updates Archives - Gst It Return https://gstitreturn.com/category/market-updates/ Lets Discuss Tax in India... Thu, 05 Mar 2026 10:37:06 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9.1 https://gstitreturn.com/wp-content/uploads/2022/05/cssf-100x100.png Market Updates Archives - Gst It Return https://gstitreturn.com/category/market-updates/ 32 32 घर खरीदने से पहले ही चेक कर लें ये 12 जरूरी कागज, वरना फंस सकते हैं बड़े कानूनी झमेले में https://gstitreturn.com/%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b0/ https://gstitreturn.com/%e0%a4%98%e0%a4%b0-%e0%a4%96%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%a6%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%9a%e0%a5%87%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%b0/#respond Thu, 05 Mar 2026 10:35:47 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6564 आजकल प्रॉपर्टी से जुड़े धोखाधड़ी और मालिकाना हक के झगड़े बढ़ रहे हैं, इसलिए खरीदारी से पहले पूरी जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) करना बेहद जरूरी है. यहां हम आपको 12 जरूरी डॉक्यूमेंट्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें पहले ही चेक कर आप आगे चलकर खुद को किसी तरह की परेशानी से बचा सकते हैं. […]

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आजकल प्रॉपर्टी से जुड़े धोखाधड़ी और मालिकाना हक के झगड़े बढ़ रहे हैं, इसलिए खरीदारी से पहले पूरी जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) करना बेहद जरूरी है. यहां हम आपको 12 जरूरी डॉक्यूमेंट्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें पहले ही चेक कर आप आगे चलकर खुद को किसी तरह की परेशानी से बचा सकते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में-

Home Buying Tips: घर खरीदना जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है. ऐसे में इस निवेश को करते समय कई बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी हो जाता है. एक छोटी सी भी गलती आगे चलकर बड़े नुकसान का कारण बन सकती है, साथ ही आपको सालों के कानूनी विवाद में फंसा सकती है. खासकर आजकल प्रॉपर्टी से जुड़े धोखाधड़ी और मालिकाना हक के झगड़े बढ़ रहे हैं, इसलिए खरीदारी से पहले पूरी जांच-पड़ताल (ड्यू डिलिजेंस) करना बेहद जरूरी है. यहां हम आपको 12 जरूरी डॉक्यूमेंट्स के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें पहले ही चेक कर आप आगे चलकर खुद को किसी तरह की परेशानी से बचा सकते हैं. आइए जानते हैं इनके बारे में- 

इन कागजों पर जरूर दें ध्यान

टाइटल डीड 

सबसे पहले टाइटल डीड (Original Title Deed) देखें. इससे पता चलता है कि बेचने वाला व्यक्ति ही असली मालिक है या नहीं. यह दस्तावेज उसके नाम पर रजिस्टर्ड होना चाहिए.चेन ऑफ टाइटल डॉक्यूमेंट्स

चेन ऑफ टाइटल डॉक्यूमेंट्स से प्रॉपर्टी का पूरा इतिहास पता चलता है.जैसे- पहले ये किसके नाम थी और कैसे ट्रांसफर हुई. अगर रिकॉर्ड साफ और लगातार है, तो विवाद की संभावना कम होती है.

एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट

तीसरा जरूरी कागज है एन्कम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (Encumbrance Certificate). इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी पर कोई लोन, बंधक या कानूनी दावा तो नहीं है.सेल एग्रीमेंट 

सेल एग्रीमेंट भी ध्यान से पढ़ें. इसमें कीमत, भुगतान की तारीख, कब्जा मिलने की तारीख और दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां लिखी होती हैं.प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद

प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें देखें. इससे पता चलता है कि कोई बकाया टैक्स तो नहीं है.

अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट

अगर आप फ्लैट या नई बिल्डिंग खरीद रहे हैं तो अप्रूव्ड बिल्डिंग प्लान, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (CC) और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जरूर चेक कर लें. ये कागज साबित करते हैं कि बिल्डिंग रहने के लिए सेफ है और सभी नियमों का पालन किया गया है.RERA रजिस्ट्रेशन

आज के समय में प्रोजेक्ट का Real Estate Regulatory Authority (RERA) में रजिस्ट्रेशन भी चेक करना जरूरी है. RERA पोर्टल पर जाकर आप प्रोजेक्ट की जानकारी, मंजूरी और किसी कानूनी केस की डिटेल देख सकते हैं.NOC, पजेशन लेटर और क्लोजर सर्टिफिकेट 

इन सब से अलग NOC (No Objection Certificates), पजेशन लेटर और अगर लोन था तो लोन क्लोजर सर्टिफिकेट भी जरूर लें.

अगर ये दस्तावेज ठीक से नहीं जांचे गए तो आप बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं. इससे आपको कोर्ट केस, अवैध निर्माण, बैंक का कब्जा जैसी परेशानियां हो सकती हैं, इसके अलावा बिजली-पानी के कनेक्शन में दिक्कत भी हो सकती है.

Source : https://ndtv.in/utility-news/12-key-documents-you-must-check-before-buying-a-home-to-avoid-legal-trouble-and-disputes-11117258

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सरकार ने जीएसटी घटाई और कंपनियों ने बढ़ा दिए दाम, हिसाब बराबर, 4 महीने में खत्‍म हो गई सारी राहत, अब सब महंगा https://gstitreturn.com/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82/ https://gstitreturn.com/%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%8f%e0%a4%b8%e0%a4%9f%e0%a5%80-%e0%a4%98%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%88-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a4%82/#respond Thu, 19 Feb 2026 10:14:11 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6558 चार महीने की चांदी और फिर अंधेरी रात. कुछ ऐसा ही नजारा देश की एफएमसीजी कंपनियों ने अपने ग्राहकों को दिखाया है. सरकार ने पिछले साल 22 सितंबर को जीएसटी कटौती करके जनता को सस्‍ते सामान का तोहफा दिया था. लेकिन, 4 महीने ही बीते हैं और कंपनियों ने दोबारा सारी चीजों के दाम बढ़ा […]

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चार महीने की चांदी और फिर अंधेरी रात. कुछ ऐसा ही नजारा देश की एफएमसीजी कंपनियों ने अपने ग्राहकों को दिखाया है. सरकार ने पिछले साल 22 सितंबर को जीएसटी कटौती करके जनता को सस्‍ते सामान का तोहफा दिया था. लेकिन, 4 महीने ही बीते हैं और कंपनियों ने दोबारा सारी चीजों के दाम बढ़ा दिए हैं. उनका कहना है कि रुपये में गिरावट से आयात महंगा हो गया और उत्‍पादन लागत भी बढ़ रही है. ऐसे में कीमतों का दबाव ग्राहकों पर डालना मजबूरी हो गया है.

नई दिल्‍ली. तू डाल-डाल, मैं पात-पात. यह बात सरकार और कंपनियों के हालिया समीकरण पर सटीक बैठती है. सरकार आम आदमी को राहत दिलाने की कितनी भी कोशिश क्‍यों न कर ले, कंपनियों ने ठान रखा है कि हम नहीं मिलने देंगे. अभी 4 महीने पहले ही तो सरकार ने रोजमर्रा इस्‍तेमाल होने वाले 200 से भी ज्‍यादा आइटम पर जीएसटी घटाकर आम आदमी को राहत दिलाने की कोशिश की थी, लेकिन कंपनियों ने इन सभी प्रोडक्‍ट के दाम बढ़ाकर इस राहत को एक झटके में छीन लिया और सरकार की मंशा पर भी पानी फेर दिया.

एफएमसीजी कंपनियों ने तेल, साबुन, टूथपेस्‍ट सहित तमाम दैनिक उपयोग वाली चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है. उनका कहना है कि लागत में बढ़ोतरी की वजह से इन वस्‍तुओं के दाम बढ़ाना जरूरी हो गया है. डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही गिरावट से कच्‍चे माल का आयात महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर उत्‍पादन लागत पर दिख रहा. ऐसे में इन प्रोडक्‍ट की कीमतों में बढ़ोतरी करना मजबूरी हो गया है.

दुकानों पर पहुंच गए महंगे वाले सामान
डिस्‍ट्रीब्‍यूटर्स का कहना है कि डिटर्जेंट, हेयर ऑयल से लेकर चॉकलेट, बिस्‍कुट, नूडल्‍स, अनाज समेत तमाम रोजमर्रा के इस्‍तेमाल की चीजों के दाम बढ़ गए हैं. इस महीने के आखिर तक इन चीजों के बढ़े दाम वाली पैकेट खुदरा दुकानों पर पहुंच जाएगी और ग्राहकों को भी महंगी कीमत पर सारे सामान मिलेंगे. जीएसटी कटौती के बाद इन सभी की खपत 6 फीसदी बढ़ गई थी, लेकिन अब फिर से बिक्री पर दबाव पड़ सकता है.

डाबर और टाटा ने कितना बढ़ाया दाम
डाबर इंडिया के सीईओ ने बताया कि चालू वित्‍तवर्ष की चौथी तिमाही में वस्‍तुओं के दाम 2 फीसदी तक बढ़ाए हैं, जो अगले साल भी लागू रहेंगी. टाटा कंज्‍यूमर प्रोडक्‍ट के प्रबंध निदेशक ने भी कहा है कि चाय की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है. जनवरी से अप्रैल तक इस बढ़ोतरी की समीक्षा की जाएगी और उसके बाद आगे कीमतें बढ़ाने पर फैसला करेंगे. जाहिर है कि इन दोनों कंपनियों के प्रोडक्‍ट आने वाले दिनों में महंगे हो जाएंगे.

एचयूएल ने महंगा कर दिया सामान
सर्फ एक्‍सेल और रिन जैसे प्रोडक्‍ट बनाने वाली कंपनी हिंदुस्‍तान यूनिलिवर ने भी तेल, साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट और पर्सनल केयर उत्‍पादों की कीमतों में बढ़ोतरी का फैसला किया है. कंपनी का कहना है कि इन सभी उत्‍पादों को बनाने में वनस्‍पति तेल का इस्‍तेमाल होता है, जिसका आयात महंगा हो गया है. लिहाजा उत्‍पादन लागत बढ़ने की वजह से इसकी कीमतें बढ़ाना जरूरी हो गया है. बाजार में बढ़ी हुई कीमत वाली पैकेट भी जल्‍द ही पहुंच जाएगी.

Source: https://hindi.news18.com/news/business/latest-gst-benefit-washout-fmcg-companies-hike-items-price-what-effect-on-consumers-ws-kl-10199452.html

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GST Council Meeting: छोटे कारोबारियों को मिल सकती है राहत, जीएसटी नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी https://gstitreturn.com/gst-council-meeting-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%bf/ https://gstitreturn.com/gst-council-meeting-%e0%a4%9b%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%bf/#respond Sat, 07 Feb 2026 08:58:36 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6554 GST Council Meeting: जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक बजट के बाद जल्द होने वाली है, जिसमें कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. सूत्रों के मुताबिक बैठक में जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल और तेज करने, रिफंड सिस्टम को बेहतर बनाने, ऑडिट से जुड़े नियमों में आसानी और ई-वे बिल की जटिलताओं को कम […]

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GST Council Meeting: जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक बजट के बाद जल्द होने वाली है, जिसमें कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. सूत्रों के मुताबिक बैठक में जीएसटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल और तेज करने, रिफंड सिस्टम को बेहतर बनाने, ऑडिट से जुड़े नियमों में आसानी और ई-वे बिल की जटिलताओं को कम करने पर चर्चा होगी. नए बदलावों का मकसद फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाना और ईमानदार व छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाना है. अगर ये प्रस्ताव मंजूर होते हैं, तो व्यापार करना पहले से ज्यादा सरल और कम समय लेने वाला हो जाएगा.

जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक जल्द होने वाली है और इसमें कारोबारियों को बड़ी राहत मिल सकती है. बजट के बाद ये बैठक बुलाई जा रही है. सूत्रों की मानें तो बैठक में जीएसटी रजिस्ट्रेशन, रिफंड, ऑडिट और ई-वे बिल से जुड़े कई बदलावों पर बात होगी. ये सब फैसले कारोबारियों की मुश्किलें कम करने और प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए हैं.

जीएसटी रजिस्ट्रेशन को और सरल बनाने पर जोर रहेगा. अभी नए कारोबारी को जीएसटी नंबर लेने में काफी समय लगता है और कागजी काम ज्यादा होता है. बैठक में प्रस्ताव है कि रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को तेज किया जाए. फर्जी रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए भी नए नियम लाए जा सकते हैं ताकि असली कारोबारी आसानी से काम कर सकें. छोटे व्यापारियों के लिए ये बहुत फायदेमंद होगा.

ऑडिट रिपोर्ट और कंप्लायंस को आसान बनाने की तैयारी

रिफंड की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने की तैयारी है. कई कारोबारी शिकायत करते हैं कि रिफंड आने में महीनों लग जाते हैं. अब रिफंड स्टेटस को डिजिटल तरीके से ट्रैक करने की सुविधा दी जा सकती है. रिफंड ज्यादा पारदर्शी और तेज होगा. अनावश्यक देरी खत्म करने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम पर काम हो रहा है. इससे कारोबारियों की कार्यशील पूंजी आसानी से उपलब्ध रहेगी और बिजनेस में कोई रुकावट नहीं आएगी.

Source: https://hindi.news18.com/news/business/latest-gst-council-meeting-gst-registration-refund-audit-e-way-bill-changes-expected-ws-l-10159026.html

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1 लाख के बना दिए 52 लाख, इस मल्‍टीबैगर शेयर पर विजय केडिया ने भी अब खेला दांव https://gstitreturn.com/1-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%8f-52-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%8d/ https://gstitreturn.com/1-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%8f-52-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%87%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a5%8d/#respond Wed, 21 Jan 2026 06:54:24 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6549 Vijay Kedia Portfolio- विजय केडिया मल्‍टीबैगर शेयर पहचानने में माहिर माने जाते हैं. दिसंबर तिमाही में केडिया ने अपने पोर्टफोलियो में दो शेयर जोड़े हैं. इनमें से एक शेयर ने पांच साल में निवेशकों को 5100 फीसदी रिटर्न दिया है. नई दिल्ली. शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक विजय केडिया के पोर्टफोलियो पर सबकी नजर रहती है. […]

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Vijay Kedia Portfolio- विजय केडिया मल्‍टीबैगर शेयर पहचानने में माहिर माने जाते हैं. दिसंबर तिमाही में केडिया ने अपने पोर्टफोलियो में दो शेयर जोड़े हैं. इनमें से एक शेयर ने पांच साल में निवेशकों को 5100 फीसदी रिटर्न दिया है.

नई दिल्ली. शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक विजय केडिया के पोर्टफोलियो पर सबकी नजर रहती है. हाल ही में दिसंबर 2025 तिमाही के शेयरहोल्डिंग डेटा सामने आए हैं, जिसमें पता चला है कि केडिया ने दो नए शेयरों पर बड़ा दांव खेला है. इसके साथ ही उनका कुल पोर्टफोलियो अब 17 शेयरों तक पहुंच गया है जिसकी कुल नेटवर्थ 1,133 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है. जिन दो नए शेयरों में केडिया ने पैसा लगाया है उनमें एक इंजीनियरिंग सेक्टर की पुरानी खिलाड़ी है, जबकि दूसरा ग्रीन एनर्जी और हाइड्रोजन ट्रांजिशन में उभरता हुआ नाम है. खास बात है कि इनमें से एक शेयर ने पिछले 5 सालों में निवेशकों के 1 लाख रुपये को 52 लाख रुपये में बदलकर सनसन मचाई है.

विजय केडिया अपनी SMILE निवेश रणनीति के लिए मशहूर हैं. इस रणनीति के तहत वे ऐसी कंपनी में पैसा लगाते हैं जो साइज में छोटी, अनुभवी प्रबंधन से संचालित महत्‍वाकांक्षी और बाजार में बड़ी संभावना लिए होती है और दमदार मुनाफा कमा रही होती है. दिसंबर तिमाही में उन्होंने जिन दो कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदी है, वे इसी फ्रेमवर्क में फिट बैठती नजर आ रही हैं. पहली कंपनी है पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड और दूसरी है अद्वैत एनर्जी ट्रांजिशन लिमिटेड (Advait Energy Transitions Ltd).

पटेल इंजीनियरिंग एक ऐसी कंपनी है जिससे केडिया का पुराना नाता रहा है. उन्होंने मार्च 2023 में इसमें एंट्री की थी और जून 2024 में जब शेयर 4 गुना हो गया, तब उन्होंने अपनी हिस्सेदारी कम की थी. अब दिसंबर 2025 तिमाही में उन्होंने फिर से 1.01% हिस्सेदारी (करीब 30 करोड़ रुपये) की रिपोर्टिंग की है. 1949 में स्थापित यह कंपनी बांध, सुरंग और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स बनाने में माहिर है. फिलहाल कंपनी के पास 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का मजबूत ऑर्डर बुक है. कंपनी ने FY21 के नुकसान के बाद जबरदस्त वापसी की है. पिछले 5 सालों में इसका मुनाफा 87% की कंपाउंडेड दर (CAGR) से बढ़ा है.

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह शेयर अपने ऑल-टाइम हाई (₹717) से करीब 96% नीचे ट्रेड कर रहा है. इसका मौजूदा PE (Price to Earnings) मात्र 8x है, जबकि इसी इंडस्ट्री की अन्य कंपनियों का औसत 18x है. यानी शेयर अभी काफी सस्ता (Under-valued) है. केडिया की यह ‘री-एंट्री’ संकेत देती है कि उन्हें कंपनी की बैलेंस शीट में सुधार और भविष्य की ग्रोथ पर पूरा भरोसा है.

Advait Energy: 5 साल में 5127 फीसदी रिटर्न

विजय केडिया की दूसरी पसंद अद्वैत एनर्जी ट्रांजिशन लिमिटेड है, जिसने पिछले 5 सालों में शेयर बाजार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. जनवरी 2021 में इस शेयर की कीमत मात्र 26 रुपये थी, जो जनवरी 2026 तक 1,359 रुपये पर पहुंच गई. यानी मात्र 5 साल में 5,127% की जबरदस्त तेजी. केडिया ने अपनी कंपनी ‘केडिया सिक्योरिटीज’ के जरिए इसमें 1.1% हिस्सेदारी (करीब 17 करोड़ रुपये) खरीदी है. कंपनी अब केवल पावर ट्रांसमिशन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर पावर जैसे भविष्य के क्षेत्रों में कदम रख दिया है.

कंपनी की FY20 में 45 करोड़ की बिक्री थी जो FY25 में बढ़कर 399 करोड़ हो गई. इसी दौरान मुनाफा 1 करोड़ से बढ़कर 32 करोड़ रुपये हो गया. यानी 131% की शानदार कंपाउंडिंग. कंपनी के पास 1,070 करोड़ रुपये के ऑर्डर हाथ में हैं, जो भविष्य की आय की गारंटी देते हैं.

क्या मार्केट मास्टर फिर मारेंगे बाजी?

विजय केडिया की ये दोनों पसंद ‘टर्नअराउंड’ और ‘हाई ग्रोथ’ का मिश्रण हैं. एक तरफ जहां पटेल इंजीनियरिंग अपने ऐतिहासिक निचले स्तरों से उबर रही है और बुक वैल्यू के भी नीचे (0.75x) मिल रही है, वहीं एडवेट एनर्जी भविष्य की ऊर्जा (Green Hydrogen) पर सवार होकर रॉकेट बनी हुई है. अक्सर जब कोई स्टॉक अपने हाई से 40-50% गिरता है, तो केडिया जैसे निवेशक उसे एक अवसर के रूप में देखते हैं, बशर्ते कंपनी के फंडामेंटल्स मजबूत हों. एडवेट एनर्जी फिलहाल अपने 52-वीक हाई से 44% नीचे है, जो केडिया के लिए खरीदारी का सही मौका साबित हुआ.

क्‍या आपको लगाना चाहिए पैसा?

विजय केडिया का पोर्टफोलियो फॉलो करना रोमांचक हो सकता है, लेकिन रिटेल निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि केडिया की जोखिम सहने की क्षमता (Risk Appetite) बहुत अधिक है. अगर आप भी इन कंपनियों में दिलचस्पी रखते हैं तो इन्हें अपनी वॉचलिस्ट में रखें और अपनी वित्तीय स्थिति के अनुसार ही फैसला लें. अच्‍छा होगा कि आप अपने निवेश सलाहकार की सलाह राय-मशिवरा करने के बाद ही इन शेयरों में पैसा लगाने का निर्णय करें.

Source : https://hindi.news18.com/news/business/money-making-tips-vijay-kedia-bets-big-two-new-stocks-one-multibagger-turns-rs-1-lakh-into-rs-52-lakh-in-5-years-ws-kl-10084823.html

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SBI ग्राहकों को ATM से पैसे निकालने पर देने होंगे 23 रुपये+GST, चेक करें पूरी डिटेल्स https://gstitreturn.com/sbi-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-atm-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be/ https://gstitreturn.com/sbi-%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-atm-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be/#respond Sat, 10 Jan 2026 08:57:59 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6544 SBI सेविंग अकाउंट कस्टमर दूसरे बैंक के ATM से हर महीने 5 फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन फ्री में कर सकेंगे।देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक- SBI के ग्राहकों के लिए एक बुरी खबर है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपने एटीएम ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़ा दिए हैं। इस नए बदलाव के साथ, अब ग्राहकों को एटीएम ट्रांजैक्शन करने […]

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SBI सेविंग अकाउंट कस्टमर दूसरे बैंक के ATM से हर महीने 5 फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन फ्री में कर सकेंगे।
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक- SBI के ग्राहकों के लिए एक बुरी खबर है। भारतीय स्टेट बैंक ने अपने एटीएम ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़ा दिए हैं। इस नए बदलाव के साथ, अब ग्राहकों को एटीएम ट्रांजैक्शन करने पर ज्यादा फीस चुकानी होगी। भारतीय स्टेट बैंक ने बताया कि इंटरचेंज फीस में बढ़ोतरी की वजह से एटीएम ट्रांजैक्शन की फीस में बढ़ोतरी की गई है। बताते चलें कि इससे पहले एसबीआई ने फरवरी 2025 में एटीएम ट्रांजैक्शन की फीस में बढ़ोतरी की थी। एसबीआई द्वारा फीस में की गई बढ़ोतरी की वजह से ऑटोमेटेड टेलर मशीन (ATM) और ऑटोमेटेड डिपॉजिट कम विड्रॉल मशीन (ADWM) ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल करना महंगा हो जाएगा।

1 दिसंबर, 2025 से ही लागू हुईं नई फीस

एसबीआई ने बताया कि बढ़ाई गई फीस 1 दिसंबर, 2025 से लागू हो चुकी है और दूसरे बैंकों के ATM इस्तेमाल करने वाले सेविंग और सैलरी अकाउंट होल्डर्स पर इसका असर पड़ेगा। हालांकि, कुछ खास कैटेगरी के अकाउंट होल्डर्स पर इस नए फैसले कोई असर नहीं पड़ेगा। बैंक ने बताया कि हर महीने फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 

अब 21 रुपये के बजाय देना होगा 23 रुपये का चार्ज

SBI सेविंग अकाउंट कस्टमर दूसरे बैंक के ATM से हर महीने 5 फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन फ्री में कर सकेंगे। हर महीने फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद प्रत्येक कैश विड्रॉल पर अब 21 रुपये के बजाय 23 रुपये का भुगतान करना होगा, इसके साथ ही GST अलग से चुकानी होगी। इसके अलावा, हर महीने नॉन-फाइनेंशियल फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट के बाद प्रत्येक ट्रांजैक्शन पर अब 10 रुपये के बजाय 11 रुपये चुकाने होंगे और अलग से जीएसटी भी देना होगा।

एसबीआई के एटीएम के लिए भी फिक्स हुई लिमिट

भारतीय स्टेट बैंक ने अपने सभी एटीएम पर फाइनेंशियल और नॉन-फाइनेंशियल दोनों तरह के ट्रांजैक्शन के लिए हर महीने फ्री ATM ट्रांजैक्शन की लिमिट 10 तय की है, जो पहले अनलिमिटेड था। अब हर महीने फ्री ट्रांजैक्शन की लिमिट खत्म होने के बाद प्रत्येक कैश विड्रॉल पर 23 रुपये के साथ GST का भी भुगतान करना होगा, जो पहले फ्री था। इसके अलावा, हर महीने फ्री ट्रांजैक्शन लिमिट खत्म होने के बाद प्रत्येक नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के लिए 11 रुपये के साथ GST का भी भुगतान करना ​​होगा। SBI के बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट (BSBD) अकाउंट के मौजूदा सर्विस चार्ज में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

ऐसे ग्राहकों के लिए कोई बदलाव नहीं

इसके अलावा, SBI ATM का इस्तेमाल करने वाले SBI डेबिट कार्ड होल्डर्स के लिए मौजूदा ATM ट्रांजैक्शन सर्विस चार्ज में कोई बदलाव नहीं हुआ है। SBI ATM पर कार्डलेस कैश विड्रॉल ट्रांजैक्शन अगले नोटिस तक अनलिमिटेड फ्री रहेंगे।

Source : https://www.indiatv.in/paisa/business/sbi-increases-atm-transaction-fees-and-fixes-limit-for-own-atm-check-full-details-2026-01-10-1189424

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एयर-वॉटर प्यूरीफायर होंगे 15% तक सस्ते! कोर्ट के एक कमेंट से उठा मामला, अब GST काउंसिल ले सकती है बड़ा फैसला https://gstitreturn.com/%e0%a4%8f%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%89%e0%a4%9f%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%97/ https://gstitreturn.com/%e0%a4%8f%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a5%89%e0%a4%9f%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%ab%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82%e0%a4%97/#respond Thu, 01 Jan 2026 07:22:08 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6540 बढ़ते प्रदूषण और अशुद्ध पानी की समस्या को देखते हुए जीएसटी काउंसिल (GST Council) एक बड़ा फैसला ले सकती है. काउंसिल अपनी अगली बैठक में एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर लगने वाले जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा होता है, तो इन उपकरणों की कीमतें […]

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बढ़ते प्रदूषण और अशुद्ध पानी की समस्या को देखते हुए जीएसटी काउंसिल (GST Council) एक बड़ा फैसला ले सकती है. काउंसिल अपनी अगली बैठक में एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर लगने वाले जीएसटी को 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने पर विचार कर रही है. अगर ऐसा होता है, तो इन उपकरणों की कीमतें 15 प्रतिशत तक कम हो जाएंगी. दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सरकार को सुझाव दिया था कि स्वच्छ हवा और पानी नागरिकों का मौलिक अधिकार है, इसलिए इन पर टैक्स का बोझ कम होना चाहिए.

हवा और पानी, ये दो ऐसी चीजें हैं, जिनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती. लेकिन आज के दौर में बढ़ता प्रदूषण और जहरीली हवा एक बड़ी चुनौती बन गई है. इसी समस्या को समझते हुए सरकार अब एक ऐसा कदम उठाने जा रही है जो सीधे आपकी जेब और सेहत से जुड़ा है.

खबरों की मानें तो जीएसटी काउंसिल अपनी अगली बैठक में एयर प्यूरीफायर (Air Purifiers) और वॉटर प्यूरीफायर (Water Purifiers) पर टैक्स की दरों को 18 प्रतिशत से घटाकर महज 5 प्रतिशत करने पर गंभीर विचार कर रही है. सरकार का मानना है कि ये उत्पाद अब ‘ऐशो-आराम’ की चीज नहीं बल्कि ‘जरूरत’ बन चुके हैं.

अफोर्डेबिलिटी में होगा बड़ा इजाफा

फिलहाल एयर और वॉटर प्यूरीफायर को ‘कंज्यूमर ड्यूरेबल्स’ की कैटेगरी में रखा गया है, जिस पर 18 प्रतिशत का भारी-भरकम टैक्स लगता है. अगर काउंसिल इसे घटाकर 5 प्रतिशत कर देती है, तो इन उत्पादों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक की सीधी गिरावट आएगी.

उदाहरण के लिए, अगर कोई एयर प्यूरीफायर अभी 15,000 रुपये का मिल रहा है, तो टैक्स घटने के बाद उसकी कीमत करीब 2,000 रुपये तक कम हो सकती है. इससे मध्यमवर्गीय परिवार भी अपने घर की हवा और पानी को साफ रखने के लिए इन उपकरणों को आसानी से खरीद पाएंगे.

दिल्ली हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इस टैक्स कटौती के पीछे दिल्ली हाई कोर्ट का भी बड़ा हाथ है. हाल ही में दिल्ली-एनसीआर की खराब वायु गुणवत्ता पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि अगर सरकार नागरिकों को स्वच्छ हवा नहीं दे सकती, तो कम से कम हवा साफ करने वाली मशीनों पर टैक्स तो कम कर दे. अदालत ने सुझाव दिया था कि एयर प्यूरीफायर को ‘मेडिकल डिवाइस’ यानी चिकित्सा उपकरण माना जाना चाहिए क्योंकि ये पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे खतरनाक कणों को रोककर बीमारियों से बचाते हैं.

प्रक्रिया जारी है, लेकिन सस्पेंस बरकरार

सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया है कि इस दिशा में काम चल रहा है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम तारीख तय नहीं हुई है. जीएसटी काउंसिल की आखिरी 56वीं बैठक सितंबर में हुई थी, लेकिन तब इन दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था. अब अगली बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहां टैक्स की इस कैंची से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद है.

निवारक चिकित्सा की भूमिका

एक जनहित याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि हाई-क्वालिटी वाले एयर प्यूरीफायर सिर्फ हवा साफ नहीं करते, बल्कि ये फेफड़ों और दिल की बीमारियों को रोकने में ‘निवारक चिकित्सा’ (Preventive Medicine) का काम करते हैं. प्रदूषण की वजह से बढ़ते अस्थमा और एलर्जी के मामलों को देखते हुए इन्हें सस्ता करना अब समय की मांग बन गया है.

Conclusion

साफ हवा और सुरक्षित पानी पर भारी टैक्स वसूलना किसी भी समाज के लिए सही नहीं है. अगर जीएसटी काउंसिल यह फैसला लेती है, तो यह देश के स्वास्थ्य और बजट दोनों के लिए एक बड़ी जीत होगी. प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में मशीनों को सस्ता करना एक छोटा लेकिन बहुत प्रभावशाली कदम साबित हो सकता है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q-1. एयर प्यूरीफायर पर वर्तमान में कितना जीएसटी लगता है?

A- वर्तमान में एयर और वॉटर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लिया जाता है.

Q-2. टैक्स घटने के बाद कीमतों पर क्या असर पड़ेगा?

A- अगर जीएसटी 18% से घटकर 5% होता है, तो प्यूरीफायर की कीमतें 10-15% तक कम हो सकती हैं.

Q-3. दिल्ली हाई कोर्ट ने एयर प्यूरीफायर के बारे में क्या कहा?

A- कोर्ट ने कहा कि अगर नागरिकों को स्वच्छ हवा नहीं मिल रही है, तो प्यूरीफायर पर टैक्स कम या खत्म होना चाहिए.

Q-4. क्या जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक की तारीख तय हो गई है?

A- फिलहाल काउंसिल की अगली बैठक की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है.

Q-5. क्या प्यूरीफायर को ‘मेडिकल डिवाइस’ माना जा सकता है?

A- याचिकाकर्ताओं की मांग है कि इन्हें चिकित्सा उपकरण माना जाए क्योंकि ये प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से बचाते हैं.

Source: https://www.zeebiz.com/hindi/personal-finance/gst/gst-council-likely-to-reduce-tax-on-air-and-water-purifiers-to-5-percent-243586

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‘साफ हवा नहीं दे सकते तो कम से कम एयर प्यूरीफायर पर GST कम कर सकते हैं’, प्रदूषण को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने लगाई फटकार https://gstitreturn.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ab-%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%ae-%e0%a4%b8/ https://gstitreturn.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ab-%e0%a4%b9%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%ae-%e0%a4%b8/#respond Thu, 25 Dec 2025 09:47:44 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6536 दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर निष्क्रियता की आलोचना की है और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के बीच एयर प्यूरीफायर पर 18% जीएसटी पर सवाल उठाया है। दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण की श्रेणी में पुनः वर्गीकृत करने और GST 18% से घटकर 5% […]

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दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर निष्क्रियता की आलोचना की है और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के बीच एयर प्यूरीफायर पर 18% जीएसटी पर सवाल उठाया है।

दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को एयर प्यूरीफायर को चिकित्सा उपकरण की श्रेणी में पुनः वर्गीकृत करने और GST 18% से घटकर 5% करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान हाई कोर्ट ने दिल्ली में वायु प्रदूषण संकट से निपटने में अधिकारियों की विफलता पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई है। हाई कोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के बीच एयर प्यूरीफायर पर 18 प्रतिशत की जीएसटी दर को लेकर सवाल उठाया है। 

एयर प्यूरीफायर पर GST कम कर सकते हैं- दिल्ली हाई कोर्ट

दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि यदि अधिकारी नागरिकों को सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा उपलब्ध नहीं करा सकते, तो कम से कम वे एयर प्यूरीफायर पर GST कम कर सकते हैं।दिल्ली हाई कोर्ट ने पूछा कि समय सीमा का क्या मतलब है? जब हजारों लोग मर रहे हैं, तो हर नागरिक को स्वच्छ हवा की जरूरत है और आप वह उपलब्ध नहीं करा पाए हैं।

जीएसटी काउंसिल को बड़ा निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में बिगड़ती एयर क्वालिटी को देखते हुए जीएसटी काउंसिल को बड़ा निर्देश जारी किया है। हाई कोर्ट ने एयर प्यूरीफायर पर जीएसटी कम करने पर विचार करने के लिए जीएसटी परिषद को जल्द से जल्द बैठक करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि काउंसिल जल्द से जल्द बैठक करे और ‘एयर प्यूरीफायर’ जीएसटी कम करने या समाप्त करने पर विचार करे। इस मामले को अब 26 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

बुधवार को कैसी है दिल्ली की हवा?

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली की एयर क्वालिटी में थोड़ा सुधार हुई है। दिल्ली का AQI ‘गंभीर’ से ‘बहुत खराब’ की कैटेगरी में आ गया है। बुधवार की सुबह दिल्ली का AQI 336 दर्ज किया गया है। मंगलवार को ये आंकड़ा 415 का था। आपको बता दें कि AQI को 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है।

Source: https://zeenews.india.com/hindi/business/gst-rate-cuts-boost-handicrafts-sector-supporting-artisans-and-cultural-economy/2995407

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GST कटौती का असर! रिटेल क्रेडिट में आई नई जान, ऑटो और कंज्यूमर लोन ने पकड़ी रफ्तार https://gstitreturn.com/gst-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bf/ https://gstitreturn.com/gst-%e0%a4%95%e0%a4%9f%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%85%e0%a4%b8%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bf/#respond Thu, 18 Dec 2025 09:51:37 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6525 GST सुधारों के बाद भारत के रिटेल क्रेडिट बाजार में तेजी आई है. ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन की मांग बढ़ी है. CMI स्कोर में सुधार से साफ है कि लोग अब ज्यादा भरोसे के साथ कर्ज ले रहे हैं और बैंक भी लोन देने में आगे आ रहे हैं.भारत में GST में किए गए […]

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GST सुधारों के बाद भारत के रिटेल क्रेडिट बाजार में तेजी आई है. ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन की मांग बढ़ी है. CMI स्कोर में सुधार से साफ है कि लोग अब ज्यादा भरोसे के साथ कर्ज ले रहे हैं और बैंक भी लोन देने में आगे आ रहे हैं.
भारत में GST में किए गए सुधारों का असर अब जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है. इसका सबसे बड़ा फायदा रिटेल क्रेडिट मार्केट को मिला है. ताजा रिपोर्ट बताती है कि लोग अब पहले के मुकाबले ज्यादा भरोसे के साथ लोन ले रहे हैं और बैंक व NBFC भी कर्ज देने में ज्यादा सहज नजर आ रहे हैं.

वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में क्रेडिट मार्केट इंडिकेटर यानी CMI का स्कोर 98 से बढ़कर 99 पहुंच गया है. यह इशारा करता है कि कर्ज लेने और देने दोनों तरफ माहौल पॉजिटिव बना हुआ है.

कर्ज सस्ता हुआ, भरोसा बढ़ा

रिपोर्ट के मुताबिक GST सुधारों के बाद कई कैटेगरी में प्रोडक्ट्स की कीमतों पर दबाव कम हुआ है. जब सामान थोड़ा सस्ता हुआ तो लोगों का खरीदने का मन भी बढ़ा. इसका सीधा असर लोन डिमांड पर पड़ा. खासकर ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर में लोगों ने EMI पर खरीदारी को फिर से अपनाना शुरू किया. यही वजह है कि CMI का ओवरऑल स्कोर मजबूत हुआ और बाजार में एक्टिविटी बढ़ी.

डिमांड साइड ने दिखाई मजबूती

अगर डिमांड पिलर की बात करें तो सितंबर 2025 की तिमाही में इसका स्कोर 93 से बढ़कर 95 हो गया. यह दिखाता है कि लोग सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि सुविधा और लाइफस्टाइल के लिए भी कर्ज लेने लगे हैं. रिपोर्ट बताती है कि इस बढ़त के पीछे सबसे बड़ा हाथ वाहन वित्त और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की मांग का रहा है. यानी लोग गाड़ी खरीदने और घर के इलेक्ट्रॉनिक सामान पर खर्च करने में ज्यादा कॉन्फिडेंट महसूस कर रहे हैं.

कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन में जबरदस्त उछाल

अक्टूबर 2025 में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के लिए लोन की मांग में जोरदार उछाल देखने को मिला. जहां पहले इसका इंडेक्स 128 के आसपास था, वहीं यह बढ़कर 189 तक पहुंच गया. इसका मतलब साफ है कि टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की खरीदारी तेजी से बढ़ी है. आसान EMI, बेहतर ऑफर और GST सुधारों ने इस ट्रेंड को और मजबूत किया है.

ऑटो सेक्टर भी फुल स्पीड में

ऑटो लोन सेगमेंट में भी अच्छी हलचल देखने को मिली. दो पहिया वाहनों के लिए लोन की मांग 249 से बढ़कर 272 हो गई. वहीं कार लोन की डिमांड भी 115 से बढ़कर 133 पर पहुंच गई. यह दिखाता है कि शहरी के साथ-साथ अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी लोग अब वाहन खरीदने का फैसला ले रहे हैं. बेहतर इनकम एक्सपेक्टेशन और फ्यूचर को लेकर भरोसा इस ट्रेंड के पीछे बड़ी वजह मानी जा रही है.

सप्लाई साइड ने भी दिया साथ

सिर्फ डिमांड ही नहीं, बल्कि लोन की सप्लाई साइड भी मजबूत हुई है. 2025 की तीसरी तिमाही में CMI के सप्लाई पिलर का स्कोर 91 से बढ़कर 97 हो गया. इसका मतलब है कि बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस अब ज्यादा खुलकर लोन दे रहे हैं. खासतौर पर गोल्ड लोन और कंज्यूमर लोन में तेजी देखने को मिली है. होम लोन, ऑटो लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स लोन की सप्लाई में भी सुधार हुआ है, जबकि पिछले साल इन सेगमेंट्स में सुस्ती थी.

ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत की बड़ी भूमिका

रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह भी सामने आई है कि कुल लोन सप्लाई में अर्ध-शहरी और ग्रामीण इलाकों की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत रही. यह दिखाता है कि अब क्रेडिट ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. छोटे शहरों और गांवों में भी लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़ रहे हैं और फॉर्मल लोन को अपना रहे हैं. यह बदलाव लंबे समय के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है.

युवाओं की बढ़ती भागीदारी

नए क्रेडिट उधारकर्ताओं की संख्या में करीब 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. खास बात यह है कि 35 साल से कम उम्र के उधारकर्ताओं में 12 प्रतिशत का उछाल आया है. इसका मतलब है कि युवा अब अपने फ्यूचर प्लान्स के लिए लोन लेने से हिचकिचा नहीं रहे. पढ़ाई, नौकरी, वाहन और घर से जुड़े फैसलों में EMI एक अहम रोल निभा रही है.

कुछ सेक्टर में दिख रहा हल्का तनाव

हालांकि रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि तस्वीर पूरी तरह से गुलाबी नहीं है. कुल मिलाकर लोन की गुणवत्ता अभी स्थिर बनी हुई है, लेकिन कुछ सेक्टर में हाल के महीनों में तनाव के संकेत मिले हैं. खासकर माइक्रो लोन और छोटे होम लोन सेगमेंट में चुनौतियां उभर रही हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यहां ज्यादा सतर्क मैनेजमेंट की जरूरत होगी.

लेंडर्स के लिए नया मौका

ट्रांसयूनियन सीआईबीएल जैन के एमडी और सीईओ भावेश जैन का कहना है कि यह समय लोन देने वाली कंपनियों के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है. नए तरह के उधारकर्ताओं और बदलती जरूरतों को समझकर अगर प्रोडक्ट्स डिजाइन किए जाएं, तो रिटेल क्रेडिट मार्केट में लॉन्ग टर्म ग्रोथ हासिल की जा सकती है. कुल मिलाकर GST सुधारों ने जिस तरह से क्रेडिट मार्केट में नई जान फूंकी है, उससे आने वाले महीनों में भी इस सेक्टर से अच्छी खबरें मिलने की उम्मीद की जा रही है.

Source: https://www.zeebiz.com/hindi/personal-finance/gst/gst-rate-cut-boosts-retail-credit-market-auto-consumer-durable-loan-demand-india-report-242574

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ITR में देनी होगी विदेशी संपत्ति और कमाई की सारी जानकारी, 31 दिसंबर के बाद हो सकती है तगड़ी कार्रवाई https://gstitreturn.com/itr-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a4/ https://gstitreturn.com/itr-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a4/#respond Tue, 09 Dec 2025 11:57:17 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6521 एसएमएस और ईमेल में टैक्सपेयर्स से 31 दिसंबर 2025 से पहले ITR को रिव्यू और रिवाइज करने की सलाह दी जा रही है, ताकि सजा से बचा जा सके। CBDT (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स) इन दिनों टैक्सपेयर्स को टेक्स्ट मैसेज और ईमेल भेज रहा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन टेक्स्ट मैसेज और ईमेल […]

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एसएमएस और ईमेल में टैक्सपेयर्स से 31 दिसंबर 2025 से पहले ITR को रिव्यू और रिवाइज करने की सलाह दी जा रही है, ताकि सजा से बचा जा सके।

CBDT (सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स) इन दिनों टैक्सपेयर्स को टेक्स्ट मैसेज और ईमेल भेज रहा है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन टेक्स्ट मैसेज और ईमेल के जरिए टैक्सपेयर्स को सलाह दी है कि अगर उन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में अपनी विदेशी इनकम और ओवरसीज ऐसेट्स की जानकारी नहीं दी है, वे 31 दिसंबर तक अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) को रिवाइज कर लें। CBDT के इस एक्शन को ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए एक चेतावनी भी समझी जा सकती है, जिन्होंने अपने आईटीआर में विदेशी इनकम और ऐसेट्स की जानकारी नहीं दी है। CBDT ऐसे टैक्सपेयर्स के लिए NUDGE (नॉन-इंट्रूसिव यूसेज ऑफ़ डेटा टू गाइड एंड इनेबल) नाम का एक कैंपेन चला रहा है, जिसके तहत विदेशी इनकम और ऐसेट्स का खुलासा किया जा सकता है।

31 दिसंबर से पहले देनी होगी जानकारी

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुकाबिक, ये दूसरा NUDGE कैंपेन है, जिसके तहत CBDT 28 नवंबर 2025 से टैक्सपेयर्स को एसएमएस और ईमेल के माध्यम से सलाह दे रहा है। इस एसएमएस और ईमेल में टैक्सपेयर्स से 31 दिसंबर 2025 से पहले ITR को रिव्यू और रिवाइज करने की सलाह दी जा रही है, ताकि सजा से बचा जा सके। बताते चलें कि CBDT ने 17 नवंबर 2024 को पहला NUDGE कैंपेन शुरू किया था, जिसमें 24,678 टैक्सपेयर्स ने AY 2024-25 के लिए अपने रिटर्न को रिवाइज किया था। पहले कैंपेन के तहत कुल 29,208 करोड़ रुपये के विदेशी ऐसेट्स और 1,089.88 करोड़ रुपये की विदेशी सोर्स से इनकम की जानकारी मिली थी।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास मौजूद है विदेशी संपत्तियों को ट्रैक करने वाला सिस्टम

CBDT ने AY2025-26 के लिए ऐसे कई हाई-रिस्क वाले मामलों की पहचान की है, जहां विदेशी ऐसेट्स मौजूद हैं, लेकिन आईटीआर में उनकी जानकारी नहीं दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीबीडीटी ने ऐसे मामलों की संख्या के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं दी है। बताते चलें कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नियमों के मुताबिक, टैक्सपेयर्स को अपने आईटीआर में विदेशी इनकम और विदेशी ऐसेट्स की जानकारी देना जरूरी है। बताते चलें कि भारत में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास अमेरिका समेत दूसरे देशों में किए जाने वाले सभी तरह के निवेश को ट्रैक करने का एक शक्तिशाली सिस्टम मौजूद है।

Source : https://www.indiatv.in/paisa/tax/all-information-about-foreign-assets-and-income-will-have-to-be-given-in-itr-strict-action-may-be-taken-after-december-31-2025-12-03-1180501

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GST Rate Cut के बावजूद नवंबर में कलेक्शन 8.9% बढ़ा, आंकड़ा पहुंचा ₹1.70 लाख करोड़ के पार https://gstitreturn.com/gst-rate-cut-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a6-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95/ https://gstitreturn.com/gst-rate-cut-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a5%82%e0%a4%a6-%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%82%e0%a4%ac%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%87%e0%a4%95/#respond Fri, 05 Dec 2025 12:07:24 +0000 https://gstitreturn.com/?p=6516 नवंबर 2025 में भारत का GST Collection 1.70 लाख करोड़ रुपये (GST Revenue) पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 8.9% की मजबूत बढ़त दिखाता है. यह वह पहला महीना है जब जीएसटी रेट कटौती के बाद पूरा महीने का कलेक्शन देखा गया है. PDF डेटा के मुताबिक CGST, SGST, IGST, Compensation Cess और Refund सभी […]

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नवंबर 2025 में भारत का GST Collection 1.70 लाख करोड़ रुपये (GST Revenue) पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 8.9% की मजबूत बढ़त दिखाता है. यह वह पहला महीना है जब जीएसटी रेट कटौती के बाद पूरा महीने का कलेक्शन देखा गया है. PDF डेटा के मुताबिक CGST, SGST, IGST, Compensation Cess और Refund सभी में महत्त्वपूर्ण रुझान दर्ज हुए हैं.

भारत का माल एवं सेवा कर (GST Collection) नवंबर 2025 में एक बार फिर मजबूत स्थिति में पहुंच गया है. आधिकारिक डेटा के मुताबिक इस महीने कुल कलेक्शन 1.70 लाख करोड़ रुपये रहा, जो साल दर साल (YoY Growth) करीब 8.9% ज्यादा है. दिलचस्प बात यह है कि यह वह पहला महीना है जब GST Rate Cut के बाद पूरे महीने का डेटा सामने आया है.

कुल नेट GST Revenue (Net GST Revenue) भी बढ़कर 1.52 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. इससे साफ है कि देश में खपत (Consumption Demand), टैक्स कंम्प्लायंस (Tax Compliance) और डिजिटल इनवॉइसिंग (E-Invoicing) सभी में सुधार हो रहा है. साथ ही नवंबर में Refund Payments (GST Refunds) में 4% की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे सरकार की Revenue Position और मजबूत दिख रही है.

पिछले साल के मुकाबले 8.9% की छलांग

नवंबर 2024 में कलेक्शन ₹13,55,242 करोड़ था, जो नवंबर 2025 में बढ़कर ₹14,75,488 करोड़ हुआ. यानी करीब ₹1.20 लाख करोड़ की सीधी बढ़त. यह बढ़त दर्शाती है कि:

बाजार में खपत स्थिर है

  • उद्योगों का उत्पादन बेहतर हो रहा है
  • टैक्स कंप्लायंस बढ़ रहा है
  • ई-वे बिल और ई-इनवॉइसिंग का असर नजर आ रहा है

CGST–SGST–IGST: किसका कलेक्शन बढ़ा?

PDF डेटा के अनुसार-

CGST- 34,843 करोड़ रुपये

सेंट्रल गुड्स एंड सर्विस टैक्स का कलेक्शन लगातार स्थिरता दिखा रहा है. उद्योगों की खपत बढ़ने से CGST में अच्छी वसूली हुई.

SGST- 42,522 करोड़ रुपये

स्टेट GST का कलेक्शन कई राज्यों में उम्मीद से अधिक रहा. कुछ राज्यों में YoY 12–15% तक की बढ़त दिखी.

IGST- 92,910 करोड़ रुपये

यही टैक्स इंटर-स्टेट सप्लाई और इंपोर्ट पर लगता है, इसलिए इसमें वृद्धि यह दर्शाती है कि देशभर में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन की गति बढ़ी है.

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रिफंड में 4% की गिरावट.. क्या मतलब निकालें?

नवंबर 2024 में रिफंड 18,954 करोड़ रुपये था, जबकि इस बार 18,196 करोड़ रुपये. यानी 4% कम. इसका मतलब है कि सरकार को ज्यादा नेट टैक्स मिला. फर्जी रिफंड क्लेम पर सख्ती बढ़ाई गई. वास्तविक क्लेम प्रोसेस तेज किया गया.

नवंबर क्यों खास था?

सरकार ने अक्टूबर में कुछ रेट्स में कटौती की थी. नवंबर वह पहला महीना रहा जब पूरा कलेक्शन नए रेट के साथ देखा गया. कोई रेट चेंज मिड-मंथ में नहीं था. कंज्यूमर खर्च स्थिर दिखा. उद्योगों की बिक्री मजबूत रही.

क्या 2026 में GST कलेक्शन और बढ़ेगा?

विशेषज्ञों के अनुसार फेस्टिव सीजन की बिक्री मजबूत रही. सर्विस सेक्टर में डिमांड मजबूत है और मैन्युफैक्चरिंग भी ग्रोथ मोड में है. इससे अनुमान है कि साल 2026 में कलेक्शन 1.75–1.80 लाख करोड़ मासिक तक जा सकता है.

CONCLUSION

नवंबर 2025 का GST कलेक्शन कई मायनों में महत्वपूर्ण साबित हुआ. GST Rate Cut के बाद पहला पूरा महीना होने के बावजूद कलेक्शन 1.70 लाख करोड़ रुपये रहा, जो अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है. PDF डेटा साफ दिखाता है कि टैक्स बेस बढ़ रहा है, उपभोग स्थिर है और सरकार की राजस्व स्थिति मजबूत हो रही है. आने वाले महीनों में भी इसी तरह के मजबूत आंकड़े देखने की उम्मीद है.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1- GST क्या होता है?

GST एक अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं और सेवाओं पर लगता है.

2- CGST और SGST में क्या फर्क है?

CGST केंद्र लेता है, SGST राज्य सरकार.

3- IGST कब लगता है?

जब सामान एक राज्य से दूसरे राज्य जाता है.

4- GST Refund कौन ले सकता है?

एक्सपोर्टर या ITC बैलेंस वाले टैक्सपेयर्स.

5- GST रिटर्न कितने होते हैं?

मुख्य रूप से GSTR-1, GSTR-3B और वार्षिक रिटर्न.

Source : https://www.zeebiz.com/hindi/personal-finance/gst/gst-collection-rises-8-9-percent-yoy-in-november-2025-crossed-rs-1-70-lakh-crore-mark-241194

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