WPI Inflation: अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर यानी WPI (Wholesale Price Index) 42 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. खास बात यह रही कि फ्यूल एंड पावर कैटेगरी में तेज उछाल देखने को मिला, जबकि प्राइमरी आर्टिकल्स और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी बढ़ी है.

WPI Inflation: ढाई महीनों से दुनिया भर में बने तनाव और सप्लाई की चिंताओं का असर अब धीरे-धीरे जमीनी स्तर पर दिखने लगा है. गुरुवार को थोक महंगाई के नंबर आए हैं, जोकि हैरान करने वाले हैं.

अप्रैल महीने में थोक महंगाई दर यानी WPI (Wholesale Price Index) 42 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. खास बात यह रही कि फ्यूल एंड पावर कैटेगरी में तेज उछाल देखने को मिला, जबकि प्राइमरी आर्टिकल्स और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी बढ़ी है. इससे आने वाले समय में कंपनियों की लागत बढ़ने और आम लोगों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है.

कितनी बढ़ी है थोक महंगाई?

अप्रैल में WPI महंगाई दर बढ़कर 8.30% पर पहुंच गई, जो पिछले महीने 3.88% थी. यानी सिर्फ एक महीने में महंगाई में बड़ा उछाल देखने को मिला. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ऊर्जा और कच्चे माल की कीमतों में तेजी की वजह से आई है.

WPI Inflation

फ्यूल और पावर सबसे ज्यादा महंगे

फ्यूल एंड पावर कैटेगरी में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज हुई. इस श्रेणी की महंगाई दर 1.05% से बढ़कर सीधे 24.71% पर पहुंच गई. पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर अब घरेलू लागत पर भी दिखाई देने लगा है.

खाद्य महंगाई दर भी बढ़कर 2.31% हो गई, जो पिछले महीने 1.85% थी. हालांकि इसमें बढ़ोतरी सीमित रही, लेकिन लगातार बढ़ती खाद्य कीमतें आम उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकती हैं.

प्राइमरी आर्टिकल्स यानी कच्चे उत्पादों की महंगाई दर 6.36% से बढ़कर 9.17% हो गई. इससे इंडस्ट्री की इनपुट कॉस्ट बढ़ने की आशंका है. वहीं मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की WPI भी 3.39% से बढ़कर 4.42% हो गई, जो यह संकेत देती है कि कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है.

मैन्युफैक्चरिंग पर क्या पड़ा असर?

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स, जिनका WPI में सबसे बड़ा 64.23% वेटेज है, उसमें भी अप्रैल में 1.40% की बढ़ोतरी हुई. इंडेक्स मार्च के 149.5 से बढ़कर 151.6 पर पहुंच गया. 22 में से 21 मैन्युफैक्चरिंग ग्रुप्स में कीमतें बढ़ीं. बेसिक मेटल्स, केमिकल्स, टेक्सटाइल्स, फूड प्रोडक्ट्स और मशीनरी एंड इक्विपमेंट जैसी कैटेगरी में अच्छी-खासी महंगाई देखने को मिली. सिर्फ ‘Other Manufacturing’ ग्रुप में कीमतों में गिरावट आई.

थोक महंगाई में इस तेजी का असर आने वाले महीनों में रिटेल महंगाई और कंपनियों की लागत पर भी देखने को मिल सकता है. खासकर अगर कच्चा तेल और फ्यूल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इसका असर FMCG, ऑटो, सीमेंट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ सकता है. इससे ब्याज दरों और बाजार के सेंटीमेंट पर भी दबाव बढ़ सकता है.

आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 WPI यानी थोक महंगाई क्या होती है?

WPI (Wholesale Price Index) उन कीमतों को मापता है, जिन पर सामान थोक बाजार में खरीदे और बेचे जाते हैं. इससे देश में प्रोड्यूसर लेवल पर महंगाई का अंदाजा मिलता है.

Q2 अप्रैल में थोक महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह क्या रही?

फ्यूल एंड पावर कैटेगरी में तेज बढ़ोतरी, खासकर कच्चे तेल और मिनरल ऑयल्स की कीमतों में उछाल, महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह रही.

Q3 क्या WPI बढ़ने का असर आम लोगों पर भी पड़ता है?

हां. जब थोक स्तर पर कीमतें बढ़ती हैं, तो कंपनियों की लागत बढ़ती है और आगे चलकर इसका असर रिटेल कीमतों पर भी पड़ सकता है.

Q4 किन सेक्टर्स पर ज्यादा असर पड़ सकता है?

ऑटो, FMCG, सीमेंट, केमिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर इनपुट कॉस्ट बढ़ने का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है.

Q5 क्या बढ़ती थोक महंगाई से ब्याज दरों पर असर पड़ सकता है?

अगर महंगाई लंबे समय तक ऊंची बनी रहती है, तो RBI भविष्य में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपना सकता है.

Source : https://www.zeebiz.com/hindi/economy/wpi-inflation-at-42-months-high-up-8-30-percent-from-3-80-percent-fuel-and-power-most-impacted-255357

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share via
Copy link
Powered by Social Snap